
देशभर में समय पर सैलरी सुनिश्चित, गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी मिली कानूनी पहचान
नई दिल्ली। देश के श्रम ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं को लागू कर दिया है। इन संहिताओं के लागू होने से न केवल 29 पुराने श्रम कानून एकीकृत हो गए हैं, बल्कि मजदूरों, कर्मचारियों और उद्योगों ,सभी के लिए प्रक्रियाएं काफी सरल और पारदर्शी हो गई हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार अब देश के सभी कामगारों को तय समय पर वेतन देना अनिवार्य होगा। महिलाकर्मियों को पुरुषों के बराबर सैलरी मिलेगी और उनके कार्यस्थल संबंधी अधिकार भी मजबूत किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इन सुधारों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निवेश में सुगमता आएगी और उद्योगों में लंबे समय से चली आ रही जटिलताओं का समाधान होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन श्रम संहिताओं से ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की गति और तेज होगी। उनके अनुसार, युवा कार्यबल को सुरक्षित वातावरण, बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।
क्या-क्या बदलेगा?
- सभी श्रमिकों को समय पर वेतन देने की बाध्यता
- महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन
- युवाओं के लिए रोजगार और स्किलिंग के अधिक अवसर
- सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा
- ओवरटाइम और ग्रेच्युटी के स्पष्ट नियम
- गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी मान्यता
विशेषज्ञों के अनुसार, नए नियम ई-काॅमर्स और ऐप-आधारित कामगारों को पहली बार एक संरक्षित ढांचा प्रदान करते हैं। वहीं उद्योग जगत का कहना है कि इससे भर्ती और संचालन में लचीलापन आएगा।
सरकार का अनुमान है कि 40 करोड़ से ज्यादा श्रमिक अब औपचारिक श्रम सुरक्षा दायरे में आएंगे, जिससे भविष्य निधि, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएँ व्यापक रूप से उपलब्ध होंगी। नई संहिताओं को देश की अर्थव्यवस्था को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।



