किराया विवाद ने लिया गंभीर रूप, संपत्ति मालिक ने लगाए अवैध मांग और झूठी एफआईआर के आरोप

वाराणसी । शहर की एक व्यावसायिक संपत्ति को लेकर लंबे समय से चला आ रहा किराया विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। मामले में संपत्ति मालिक वी.के. मालू ने किरायेदार पक्ष अनूप सर्राफ व केशव सर्राफ पर अवैध मांग, जबरन कब्जे की कोशिश और झूठी एफआईआर दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त संपत्ति को पोकर मैनिया के नाम से पांच वर्षों की लीज पर दिया गया था, जिसकी अवधि 30 सितंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद परिसर खाली नहीं किया गया। मकान मालिक का दावा है कि करीब तीन वर्षों का किराया अभी भी बकाया है।
किराया न मिलने पर परिसर किया गया बंद
सूत्रों के मुताबिक लगातार किराया न मिलने के कारण 28 दिसंबर 2025 को मकान मालिक पक्ष ने परिसर को बंद कराया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण रही, जिसमें न तो किसी प्रकार की हिंसा हुई और न ही फर्नीचर या अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
₹5 करोड़ की मांग का आरोप
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अनूप सर्राफ और केशव सर्राफ पर परिसर खाली करने के बदले ₹5 करोड़ की कथित मांग करने का आरोप सामने आया। मकान मालिक का कहना है कि यह मांग पूरी तरह अवैध है और संपत्ति पर दबाव बनाकर कब्जा जमाने का प्रयास प्रतीत होती है।
झूठी एफआईआर दर्ज कराने का दावा
वी.के. मालू का आरोप है कि घटनाक्रम के बाद उनके खिलाफ भ्रामक और तथ्यों को छिपाकर एफआईआर दर्ज कराई गई। उनका कहना है कि एफआईआर में लीज समाप्ति, किराया बकाया और किसी प्रकार की हिंसा न होने जैसे अहम बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया है।
आरोपों से किया इनकार, कानूनी लड़ाई के संकेत
मकान मालिक पक्ष ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने न तो बल प्रयोग किया और न ही किसी प्रकार की धमकी या तोड़फोड़ की। उनका कहना है कि उठाए गए कदम केवल अपने वैध संपत्ति अधिकारों की रक्षा के लिए थे। इस मामले में अब दोनों पक्षों के बीच कानूनी कार्रवाई तेज होने के संकेत हैं। वी.के. मालू ने झूठी एफआईआर, अवैध मांग और किराया बकाया को लेकर न्यायालय की शरण लेने की बात कही है।
फिलहाल प्रकरण की जांच जारी है और आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



