फाइल में रखे गए नोट बने जमानत का आधार, रिश्वत मामले में दारोगा धनंजय सिंह को राहत

हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ / महाराजगंज। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के महानगर क्षेत्र स्थित पेपरमिल चौकी में तैनात रहे चौकी इंचार्ज धनंजय सिंह को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। मामला अक्टूबर 2025 के आसपास का है, जब एंटी करप्शन टीम ने दारोगा को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेजा गया था और यह मामला काफी चर्चा में रहा।
जमानत का आधार अदालत में यह बना कि रिश्वत की रकम आरोपी दारोगा की जेब या शरीर से बरामद नहीं हुई, बल्कि एक फाइल के अंदर रखी हुई मिली थी। अदालत में इसी तथ्य को प्रमुख आधार मानते हुए यह माना गया कि सीधे तौर पर आरोपी के शरीर से धनराशि की बरामदगी नहीं हुई, जिस पर उसे जमानत दे दी गई।

इस मामले में खास बात यह रही कि गिरफ्तारी के समय का वीडियो भी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ था, जिसमें फाइल के अंदर 500-500 रुपये की गड्डियां रखी होने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद तकनीकी आधार पर राहत मिलने से कानून की व्याख्या और उसकी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटना के बाद आमजन में यह चर्चा तेज है कि क्या रिश्वतखोरी जैसे गंभीर मामलों में सिर्फ बरामदगी की जगह ही निर्णायक बनती जा रही है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे मामलों में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और सेवा से हटाने जैसी सख्त पहल क्यों नहीं की जाती, ताकि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।





