दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी, 4 घंटे में पूरा होगा सफर

नई दिल्ली/वाराणसी। देश की हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को रफ्तार देते हुए रेलवे बोर्ड ने दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है। 840 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित कॉरिडोर पर अगले दो से तीन महीनों में जमीनी काम शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का सफर, जो वर्तमान में 8 से 12 घंटे लेता है, महज 4 घंटे में सिमट जाएगा।
250–350 किमी प्रति घंटा होगी रफ्तार
हाई-स्पीड ट्रैक पर ट्रेनें 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। सरकार ने देशभर में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का निर्णय लिया है। हालिया बजट में इन परियोजनाओं के लिए लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान जताया गया है। उद्देश्य है महानगरों के बीच दूरी कम कर आर्थिक गतिविधियों को नई गति देना।
13 से 14 स्टेशन प्रस्तावित
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेलवे बोर्ड को सौंप दी गई है। प्रस्तावित रूट दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, लखनऊ और प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक जाएगा। इस कॉरिडोर पर 13 से 14 स्टेशन विकसित किए जाने की योजना है। निर्माण लागत और सटीक एलाइनमेंट तय करने के लिए फिलहाल LiDAR तकनीक से सर्वेक्षण कार्य चल रहा है।
प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में तेजी के निर्देश
रेलवे बोर्ड ने सभी सातों कॉरिडोर के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। भूमि अधिग्रहण, डिजाइन और टेंडर प्रक्रिया जैसी प्रारंभिक औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करने को कहा गया है। छह परियोजनाओं की रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जबकि वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर सर्वेक्षण जारी है। अब प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट बोर्ड को प्रस्तुत करनी होगी।
तकनीक चयन पर अंतिम फैसला शेष
सभी हाई-स्पीड परियोजनाओं के लिए एक समान तकनीकी मानक लागू किए जाएंगे। इसके लिए प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता का आकलन भी किया जा रहा है। जर्मनी, फ्रांस या रूस में से किस देश की तकनीक अपनाई जाएगी, इस पर अंतिम निर्णय अभी शेष है। परियोजना के धरातल पर उतरते ही दिल्ली और पूर्वांचल के बीच आवागमन में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।



