लुठहवा में वोटर लिस्ट को लेकर विवाद गहराया

एक पक्ष ने गड़बड़ी का लगाया आरोप, बीएलओ ने मारपीट व तोड़फोड़ की दी तहरीर
नौतनवा/महराजगंज। परसा मलिक क्षेत्र के ग्राम सभा लुठहवा में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर ग्रामीण ने बीएलओ पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर बीएलओ ने पंचायत भवन में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और सरकारी दस्तावेज फाड़ने की शिकायत की है। मामला अब तहसील स्तर तक पहुंच गया है और जांच की बात कही जा रही है।
जगन्नाथ का आरोप: “मनमाने ढंग से हो रहा काम“
ग्राम लुठहवा निवासी जगन्नाथ यादव ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव को लेकर तैयार की जा रही मतदाता सूची में अनियमितता की जा रही है। उनका कहना है कि बीएलओ विकास कुमार यादव नाम जोड़ने और घटाने का कार्य मनमाने तरीके से कर रहे हैं। शिकायत करने पर कथित रूप से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
जगन्नाथ ने यह भी आरोप लगाया कि बीएलओ का व्यवहार ग्रामीणों के प्रति ठीक नहीं है और वे अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में तहसील नौतनवा में शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
बीएलओ का पक्ष: “फर्जी नाम जोड़ने का बना रहे थे दबाव”
दूसरी ओर बीएलओ विकास कुमार यादव ने संपूर्ण समाधान दिवस में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 2 फरवरी 2026 को जगन्नाथ यादव कुछ लोगों के साथ घोड़हवा स्थित पंचायत भवन पहुंचे और फर्जी नाम मतदाता सूची में दर्ज करने का दबाव बनाने लगे। मना करने पर गाली-गलौज कर लौट गए।
बीएलओ के अनुसार, 19 फरवरी को दोबारा कुछ लोगों के साथ पंचायत भवन पहुंचे और दबाव बनाने लगे। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई, घड़ी और मोबाइल तोड़ दिया गया तथा कार्यालय में रखा कंप्यूटर और सीसीटीवी कैमरा क्षतिग्रस्त कर दिया गया। साथ ही कुछ सरकारी दस्तावेज फाड़ने का भी आरोप लगाया गया है।
बीएलओ ने यह भी आरोप लगाया कि बीच-बचाव करने आए ग्रामीण मुंशी पुत्र भालू को भी चोटें आईं और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। जाते समय जान-माल की धमकी देने की बात भी कही गई है।
प्रशासन का रुख
इस संबंध में जब नौतनवा के उपजिलाधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वोटर लिस्ट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है। ग्रामीणों की नजर अब जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।



