वाराणसी दालमंडी ध्वस्तीकरण मामला: परिसर खाली होते ही किरायेदार के अधिकार खत्म – इलाहाबाद हाईकोर्ट

दालमंडी सड़क चौड़ीकरण के विरोध में दाखिल याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा– बेदखली का अलग नोटिस जरूरी नहीं

वाराणसी । दालमंडी में सड़क चौड़ीकरण के लिए की जा रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी परिसर को खाली करते ही किरायेदार के सभी विधिक अधिकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं और ऐसे मामलों में अलग से बेदखली का नोटिस देना आवश्यक नहीं होता।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वाराणसी निवासी फरमान इलाही की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याची ने दावा किया था कि वह कुंडिगढ़ टोला दालमंडी स्थित एक मकान में किरायेदार था और राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण से पहले उसे संबंधित धारा के तहत नोटिस देना चाहिए था। याची का कहना था कि वह संपत्ति से जुड़ा हितबद्ध पक्षकार है, इसलिए उसे सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता श्रुति मालवीय ने कोर्ट को बताया कि याची केवल किरायेदार है और संपत्ति पर उसका कोई स्वामित्व अधिकार नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि याची ने आंशिक रूप से ध्वस्त संपत्ति की तस्वीरें प्रस्तुत कर अंतरिम राहत लेने की कोशिश की, जबकि वास्तविकता में भवन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था।
कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए 30 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया था। इस योजना के तहत भूमि स्वामियों की सहमति से जमीन खरीदी जानी थी। संबंधित मकान के मालिक शहनवाज खान ने राज्यपाल के पक्ष में बिक्री पत्र निष्पादित कर कब्जा सौंप दिया था।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किरायेदार के अधिकार तभी तक कायम रहते हैं जब तक वह किराया देते हुए बेदखली के आदेश का सामना करता है। परिसर खाली होने के बाद उसके सभी कानूनी अधिकार समाप्त हो जाते हैं।
फिलहाल दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर कुछ दुकानदारों में हल्की नाराजगी देखी जा रही है, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई जारी है।



