डिप्टी सीएम आवास पर पहली बार ‘कोर’ मंथन, बदले सियासी संकेत

कालिदास मार्ग से हटकर ब्रजेश पाठक के घर जुटेगी सत्ता-संगठन की ताकत, ‘मिशन 2027’ पर बनेगा रोडमैप
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार शाम एक नया अध्याय जुड़ गया है। पहली बार भाजपा की अहम ‘कोर कमेटी’ की बैठक मुख्यमंत्री आवास के बजाय उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर आयोजित हुई। इस बैठक में पार्टी की नई प्रदेश टीम का गठन और अग्रिम मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर चर्चा हुई। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह मौजूद रहे।

अब तक इस तरह की रणनीतिक बैठकों का आयोजन 5 कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास या पार्टी मुख्यालय में ही होता रहा है। ऐसे में बैठक स्थल में बदलाव को सियासी गलियारों में बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसे संगठन और सरकार के बीच ‘सामूहिक नेतृत्व’ और शक्ति संतुलन के नए प्रयोग से जोड़कर देखा जा रहा है।
पहली बार डिप्टी सीएम को मेजबानी का मौका
राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल भी उठ रहा है कि जो अवसर पूर्व में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को नहीं मिला, वह इस बार ब्रजेश पाठक को कैसे मिला। हालांकि वर्ष 2022 के चुनाव से पहले मुख्यमंत्री और संघ पदाधिकारी मौर्य के आवास पर केवल औपचारिक मुलाकात और भोजन के लिए पहुंचे थे, लेकिन आधिकारिक ‘कोर कमेटी’ की बैठक की मेजबानी पहली बार किसी डिप्टी सीएम को दी जा रही है।
‘मिशन 2027’ पर तय होगी रणनीति
बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर जोर रहेगा। भाजपा की ओर से संघ को आश्वासन दिया गया है कि 30 मार्च तक सभी जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन और 15 अप्रैल तक प्रदेश टीम का पुनर्गठन पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा 15 मई तक निगमों, आयोगों और बोर्डों में लंबित राजनीतिक नियुक्तियों को पूरा करने की रूपरेखा भी तय की जाएगी।
पंचायत चुनाव और ओबीसी मुद्दों पर भी मंथन
बैठक में पंचायत चुनावों की तैयारी, ओबीसी आयोग के गठन और अन्य चुनावी रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर विशेष फोकस रहा।
समन्वय बैठक का अगला चरण
यह बैठक 20 मार्च को मुख्यमंत्री आवास पर हुई लंबी ‘समन्वय बैठक’ का अगला चरण मानी जा रही है। उस बैठक में संघ ने मंत्रियों और विधायकों की कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए तालमेल सुधारने की जरूरत बताई थी। साथ ही, विवादित बयानों से बचते हुए राष्ट्रवाद के मुद्दे को प्रमुखता देने की सलाह दी गई थी।
रविवार की बैठक में इन सभी बिंदुओं पर ठोस निर्णय लेकर आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती की दिशा में अंतिम रणनीति तय किए जाने की उम्मीद जगी।



