डोमरी में आकार ले रहा 350 बीघा का ‘ग्रीन काशी’, 2.51 लाख पौधों की बढ़त से नगर निगम संतुष्ट

काशीनाथ पाण्डेय ब्यूरो वाराणसी
वाराणसी। नगर निगम की महत्वाकांक्षी ‘ग्रीन काशी’ परियोजना अब धरातल पर साकार होती नजर आ रही है। डोमरी (सुजाबाद) क्षेत्र में 350 बीघा में विकसित किए जा रहे मियावाकी वन का बुधवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान पौधों की प्रगति और उनकी जीवन दर को देखकर दोनों अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया।
निरीक्षण के दौरान महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए पौधों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय तत्काल लागू किए जाएं। उन्होंने कहा कि कोमल पौधों को तेज धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट का ‘सुरक्षा कवच’ तैयार किया जाए और सिंचाई के लिए रेनगन सिस्टम का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही समय-समय पर खाद देने और निराई-गुड़ाई कराने के निर्देश भी दिए गए।
परियोजना की खासियत इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप है। पूरे वन क्षेत्र को काशी के 60 ऐतिहासिक गंगा घाटों जैसे दशाश्वमेध, मणिकर्णिका और अस्सी के नाम पर अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर में शीशम, सागौन, अर्जुन समेत 27 देशी प्रजातियों के साथ अश्वगंधा और गिलोय जैसे औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं।
नगर निगम के अनुसार, एक मार्च को एक घंटे में 2,51,446 पौधे रोपकर बनाए गए विश्व कीर्तिमान की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वन क्षेत्र की निगरानी के लिए 25 सीसीटीवी कैमरे, रात्रि प्रकाश के लिए 20 हाईमास्ट लाइटें तथा 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।
नगर निगम का मानना है कि ‘ग्रीन काशी’ भविष्य में न केवल पर्यावरण संतुलन को मजबूत करेगी, बल्कि गंगा तट पर हरित विरासत के रूप में काशी की सुंदरता बढ़ाने के साथ आय सृजन का भी बड़ा माध्यम है।



