संस्कृत और तमिल भारत की आत्मा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

काशी नाटकोट्टई नगर क्षेत्रम धर्मशाला के उद्घाटन समारोह में बोले सीएम , “गंगा से कावेरी तक हमारी साझी परंपरा भारत की एकता का प्रतीक”
वाराणसी, 31 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को काशी नाटकोट्टई नगर क्षेत्रम में नवनिर्मित धर्मशाला के उद्घाटन समारोह में कहा कि “संस्कृत और तमिल भारत की आत्मा हैं।” उन्होंने कहा कि गंगा से लेकर कावेरी तक फैली हमारी साझी परंपरा भारत की अखंडता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने “वनक्कम काशी” कहकर अपना संबोधन प्रारंभ किया और कहा कि भारत की विविध भाषाएं और संस्कृतियां मिलकर एक शाश्वत, समावेशी और अटूट राष्ट्र की आत्मा बनाती हैं।
उत्तर-दक्षिण भारत की एकात्मता का प्रतीक हैं काशी विश्वनाथ और रामेश्वरम
योगी ने कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम धाम और काशी के भगवान विश्वेश्वर — दोनों ही भगवान शिव के दिव्य स्वरूप हैं और उत्तर-दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकात्मता के प्रतीक हैं।
उन्होंने बताया कि आदि शंकराचार्य ने काशी में आकर ज्ञान प्राप्त किया और संपूर्ण भारत को अद्वैत दर्शन का संदेश दिया।
तमिलनाडु की ‘तेनकाशी’ है दक्षिण की काशी
सीएम योगी ने बताया कि तमिलनाडु की तेनकाशी को दक्षिण की काशी कहा जाता है। वहां के राजा ने काशी से ज्योतिर्लिंग लाकर तेनकाशी में भगवान विश्वनाथ की स्थापना की थी। यह भारत की सांस्कृतिक एकता और साझा आस्था का अद्भुत उदाहरण है।
संस्कृत और तमिल में निहित है भारत की सांस्कृतिक समृद्धि
योगी ने कहा कि संस्कृत और तमिल दोनों ही भारत की सबसे प्राचीन भाषाएं हैं, जिनमें भारतीय संस्कृति के सभी तत्व समान रूप से संरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं से निकला साहित्य समरसता और सद्भाव का संदेश देता है।
अयोध्या में तमिल संतों के नाम पर चार प्रमुख द्वार
मुख्यमंत्री ने बताया कि अयोध्या धाम में श्री त्यागराज स्वामी, श्री पुरंदरदास स्वामी और श्री अरुणाचल कवि की प्रतिमाएं





