मिठौरा में अल्पकालीन निविदा पर उठे सवाल, पारदर्शिता पर घिरे अधिकारी

विज्ञापन में देरी से प्रक्रिया संदिग्ध, ग्रामीणों ने फर्जी फर्मों के जरिए गड़बड़ी का लगाया आरोप
महराजगंज जिले के मिठौरा ब्लॉक में अल्पकालीन निविदा के जरिए सामग्री आपूर्ति प्रक्रिया को लेकर बड़े खेल की आशंका जताई जा रही है। निविदा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने इसे महज कागजी प्रक्रिया करार दिया है।
जानकारी के अनुसार, मिठौरा ब्लॉक क्षेत्र के कशमरिया और अरनहवा ग्राम सभाओं में पूर्व में भी इसी तरह की स्थिति सामने आ चुकी है, जिससे वर्तमान निविदा प्रक्रिया पर संदेह और गहरा गया है। मौजूदा निविदा में आपूर्तिकर्ताओं को 7 अप्रैल 2026 को दोपहर 2:00 बजे तक कार्यालय में बोली लगाने का समय निर्धारित किया गया था।
नियमों के तहत निविदा का समय से प्रकाशन कराना अनिवार्य होता है, ताकि इच्छुक आपूर्तिकर्ताओं को पर्याप्त अवसर मिल सके। हालांकि, संबंधित निविदा का विज्ञापन एक दैनिक समाचार पत्र में उसी दिन यानी 7 अप्रैल को प्रकाशित किया गया, जिस दिन अंतिम तिथि निर्धारित थी। ऐसे में प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव अशोक कुमार निगम ने बताया कि निविदा का विज्ञापन 1 अप्रैल को ही प्रकाशन के लिए भेज दिया गया था, लेकिन समय पर प्रकाशन न होने के कारण ग्राम सभा में निविदा फार्म उपलब्ध नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि अब अगले सप्ताह नई तिथि तय कर संशोधित विज्ञापन प्रकाशित कराया जाएगा।
वहीं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की निविदाएं अक्सर कागजों तक सीमित रह जाती हैं और फर्जी फर्मों के माध्यम से मनचाहे लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए लाखों रुपये के भुगतान का रास्ता तैयार किया जाता है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में मिठौरा ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी राहुल सागर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।



