यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा निरस्त, मुख्यमंत्री योगी का बड़ा फैसला

धांधली की पुष्टि के बाद यूपी सरकार ने लिया सख्त निर्णय, जल्द होगी पुनः परीक्षा
लखनऊ, 07 जनवरी। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली सभी भर्तियों व चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में अनियमितताओं की पुष्टि होने पर माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद हेतु अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा को लेकर नकल, धांधली और अवैध धन वसूली की सूचनाएं एसटीएफ को प्राप्त हुई थीं। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की गोपनीय जांच कराई गई।
जांच के दौरान एसटीएफ ने 16 व 17 अप्रैल 2025 को आयोजित परीक्षा में फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन अभियुक्त महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया। इस संबंध में थाना विभूतिखंड, लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तत्कालीन आयोग अध्यक्ष से त्यागपत्र भी लिया गया।
पूछताछ में अभियुक्त महबूब अली ने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान प्रश्नपत्र निकालकर अभ्यर्थियों को धन लेकर उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की, जिसकी पुष्टि एसटीएफ की विवेचना और डेटा विश्लेषण में हुई। आगे की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है।
इन तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा का पुनः आयोजन शीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ कोई समझौता न हो।



