युवाओं में बढ़ती नशे की लत: समाज और परिवार के लिए गंभीर चेतावनी

संस्कार, जागरूकता और सकारात्मक वातावरण से ही नशामुक्त समाज का निर्माण संभव : रवीन्द्र शर्मा
महराजगंज। वर्तमान समय में युवाओं और किशोरों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति समाज के सामने एक गंभीर सामाजिक और नैतिक चुनौती बनकर उभर रही है। शिक्षक एवं स्वतंत्र लेखक रवीन्द्र शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य और विकसित समाज की नींव अच्छे संस्कार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वस्थ पारिवारिक वातावरण और सामाजिक जिम्मेदारी पर टिकी होती है। यदि नई पीढ़ी इन मूल्यों से दूर होती है तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि परिवार बच्चों की पहली पाठशाला होता है, जहां उन्हें संस्कार और जीवन के मूलभूत मूल्य प्राप्त होते हैं। इसके बाद विद्यालय और सामाजिक वातावरण उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। ऐसे में माता-पिता, शिक्षक और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है कि बच्चों को सही दिशा प्रदान करें।
आज के समय में मोबाइल की अत्यधिक लत, रिश्तों में बढ़ती दूरियां, आलस्य और अनुशासनहीनता जैसी समस्याएं युवाओं के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। इसके साथ ही शराब, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों का बढ़ता सेवन सामाजिक असंतुलन को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि अशिक्षा, गलत संगति, मानसिक तनाव, दिखावे की प्रवृत्ति और जीवन की चुनौतियों से बचने की मानसिकता युवाओं को नशे की ओर धकेलती है।
उन्होंने चिंता जताई कि आज 15 से 18 वर्ष की आयु के किशोर भी नशे की गिरफ्त में आते दिखाई दे रहे हैं। यह न केवल उनके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए घातक है, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। नशे के कारण शरीर का रासायनिक संतुलन बिगड़ता है और धीरे-धीरे व्यक्ति गंभीर बीमारियों तथा असमय मृत्यु की ओर बढ़ने लगता है।
उन्होंने कहा कि हर नशीले उत्पाद पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी लिखी होती है, इसके बावजूद लोग स्वयं अपने जीवन को संकट में डाल रहे हैं। यह स्थिति समाज में जागरूकता की कमी और नैतिक मूल्यों के ह्रास को दर्शाती है।
नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सबसे पहले बड़ों को स्वयं अपने आचरण में सुधार लाना होगा, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो अपने आसपास देखते हैं। माता-पिता को बच्चों की संगति, पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जबकि शिक्षकों को विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना चाहिए।
उन्होंने समाज से अपील की कि नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए और युवाओं को सकारात्मक सोच, शिक्षा, खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए। उनका मानना है कि जब समाज स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित होगा, तभी राष्ट्र विकास और समृद्धि के शिखर पर अग्रसर हो सकेगा।
— रवीन्द्र शर्मा
शिक्षक एवं स्वतंत्र लेखक



