उत्तर प्रदेशमहराजगंज

अमृत सरोवर में अनियमितता पर प्रशासन का शिकंजा, तीन ईओ समेत पांच पर कार्रवाई की संस्तुति


करीब चार करोड़ की परियोजना की जांच में सामने आई लापरवाही, तीन बच्चों की डूबने से मौत का मामला भी जांच के दायरे में


महराजगंज। सिसवा बाजार नगर पालिका परिषद के मीरा बाई नगर वार्ड संख्या-25 में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजना में कथित अनियमितताओं के मामले में जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, अवर अभियंता और लिपिक के निलंबन की संस्तुति की गई है। वहीं एक तत्कालीन अधिशासी अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगे जाने की संस्तुति की गई है। वर्तमान अधिशासी अधिकारी को भी स्पष्टीकरण जारी किया जा चुका है।


मामले की शिकायत मिलने के बाद 18 जुलाई को जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। इसमें उप जिलाधिकारी निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग तथा उपायुक्त श्रम रोजगार को शामिल किया गया था। समिति को परियोजना में लगाए गए भ्रष्टाचार, निर्माण की गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्थलीय एवं अभिलेखीय जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।


तीन बच्चों की मौत को भी जांच में किया शामिल


जांच के दौरान अमृत सरोवर में तीन बच्चों की डूबने से हुई मौत की घटना को भी गंभीरता से लिया गया। जिलाधिकारी ने यह जांच कराने के निर्देश दिए कि निर्माण कार्य और उसके पर्यवेक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन किया था या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों की भूमिका तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। घटना के तत्काल बाद संबंधित ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेजने की कार्रवाई भी की गई थी।


जांच आख्या के आधार पर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत सिसवा बाजार संदीप कुमार सरोज, अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा का स्पष्टीकरण प्राप्त किए जाने की संस्तुति की गई है। जिलाधिकारी ने इस संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र भेजकर नियमानुसार कार्रवाई का अनुरोध किया है।


जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि सरकारी धन से संचालित विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, घटिया निर्माण और पर्यवेक्षण में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता से समझौता नहीं होगा। दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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