रंग, उल्लास और समरसता का महापर्व- होली

महाराजगंज। ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति नव-पल्लवित होकर अपने पूर्ण वैभव में दिखाई देने लगती है। फाल्गुन मास की मादक बयार और चारों ओर बिखरे रंगों के बीच होली का पावन पर्व जन-जन में उत्साह, उमंग और उल्लास का संचार करता है। यह त्योहार केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और नवसंकल्प का संदेश भी देता है।

होली भारतीय संस्कृति की जीवंतता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमें आपसी भेदभाव, द्वेष और कटुता को भुलाकर प्रेम और भाईचारे के रंग में रंगने की प्रेरणा देता है। रंगों की यह छटा समाज में समानता और सौहार्द का वातावरण निर्मित करती है, जहाँ सभी वर्ग और समुदाय एक साथ हर्षोल्लास के साथ इस उत्सव में सहभागी बनते हैं।

होलीका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और सत्य के प्रति उनकी निष्ठा हमें यह संदेश देती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए। यह पर्व आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है, जिससे हम अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागकर सकारात्मकता की ओर अग्रसर हो सकें।
वर्तमान समय में आवश्यकता है कि हम इस पर्व को संयम, मर्यादा और पर्यावरणीय सजगता के साथ मनाएँ। रासायनिक रंगों के स्थान पर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें तथा जल संरक्षण का विशेष ध्यान रखें। सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण होली मनाना हम सभी का कर्तव्य है।
होली का यह पावन अवसर हमारे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य के रंग भर दे। “ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना के साथ हम सब मिलकर राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता के संकल्प को और मजबूत करें। इसी कामना के साथ सभी पाठकों को मंगलमयी, गरिमामयी और आनंदमयी होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।




