उत्तर प्रदेशमहराजगंज

ग्राम पंचायतों में फर्जी बिलों से लाखों की निकासी का खेल, बिना लाइसेंस सप्लाई पर सख्त हुआ कृषि विभाग


खरपतवार नाशक दवाओं की सप्लाई में अनियमितता उजागर, जिला कृषि अधिकारी ने दिए कार्रवाई के संकेत


• सदर ब्लाक के ग्राम पंचायत बड़हरा राजा में पल्लवी ट्रेडर्स का आया मामला


महराजगंज जिले की ग्राम पंचायतों में आवश्यक सामग्रियों की सप्लाई के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि कुछ फर्में बिना वैध लाइसेंस के कृषि विभाग से संबंधित रसायनों की सप्लाई दिखाकर फर्जी बिलों के जरिए राज्य वित्त से लाखों रुपये का भुगतान प्राप्त कर रही हैं।


नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों में आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति के लिए निविदा प्रक्रिया अनिवार्य होती है, जिसमें विभिन्न फर्मों के बीच प्रतिस्पर्धा के बाद चयन किया जाता है। लेकिन जांच में सामने आ रहा है कि कई फर्में ऐसे रसायनों की आपूर्ति का दावा कर रही हैं, जिनके लिए संबंधित विभाग से लाइसेंस जरूरी है।


जानकारी के अनुसार खरपतवार नाशक दवा, एंटी लार्वा दवा, मीरा 447 और टू-फोर-डी जैसे रसायनों की सप्लाई बिना कृषि विभाग की अनुमति के नहीं की जा सकती। इसके बावजूद फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान कराए जाने के मामले सामने आ रहे हैं।


ताजा मामला सदर ब्लॉक के ग्राम पंचायत बड़हरा राजा का है, जहां पल्लवी ट्रेडर्स, पड़री बुजुर्ग (वार्ड नंबर 17, नगर पालिका महराजगंज) द्वारा 20 फरवरी 2026 को 36,620 रुपये का भुगतान खरपतवार नाशक दवा के नाम पर प्राप्त किए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि यह भुगतान फर्जी बिल के आधार पर कराया गया।


इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस कोई भी फर्म कृषि से संबंधित रसायनों की सप्लाई नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई फर्म इस प्रकार के सामान की आपूर्ति करना चाहती है, तो उसे पहले विभाग से विधिवत लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।


उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रकार की अनियमितताओं में शामिल फर्मों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


जिला कृषि अधिकारी के सख्त रुख के बाद जनपद के विभिन्न ब्लॉकों में हड़कंप मच गया है। कई फर्मों में कार्रवाई का भय देखा जा रहा है, वहीं विभाग ने भी जांच प्रक्रिया तेज करने के संकेत दिए हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई, तो सरकारी धन का दुरुपयोग लगातार बढ़ता रहेगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और दोषियों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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