इंडो नेपालमहराजगंज

हथियार छोड़ अब कपड़ा फैक्ट्री चलाएगी नेपाली सेना!

मनोज कुमार त्रिपाठी/ उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू/महराजगंज : नेपाल की सेना अब खेती के बाद कपड़ा फैक्‍ट्री चलाना चाहती है। नेपाल की सेना पहले ही कई बिजनेस में शामिल है। इनमें पेट्रोलियम प्रॉडक्‍ट से लेकर पीने का बोतलबंद पानी तक बेचती है। अब नेपाली सेना कपड़ा फैक्‍ट्री भी चलाना चाहती है जिसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। विशेषज्ञों ने नेपाली सेना की इस योजना का कड़ा विरोध किया है। उन्‍होंने कहा कि नेपाली सेना पाकिस्‍तानी आर्मी की राह पर बढ़ रही है जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। नेपाल की यह कपड़ा फैक्‍ट्री लंबे समय से बंद है और अब उसे नेपाली सेना शुरू करना चाहती है। इस फैक्‍ट्री का नाम हेटौड़ा कपड़ा उद्योग है और यहां 25 साल से काम नहीं हो रहा है। इस फैक्‍ट्री को 4 साल पहले बंद कर दिया गया था।


बीते बुधवार को नेपाली सेना ने प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड को हेटौड़ा कपड़ा उद्योग को फिर से शुरू करने की योजना के बारे में बताया। इसे ‘बीमार उद्योग’ बताया गया है और इसकी मशीनों और जमीन की देखरेख नेपाल सरकार करती है। नेपाल की सेना बिजनेस में अनावश्‍यक तरीके से बड़े पैमाने पर शामिल होती जा रही है। नेपाली सेना सड़क निर्माण, स्‍कूल, मेडिकल कॉलेज भी चलाती है। इससे कमाई करती है। इसको लेकर नेपाली सेना की कड़ी आलोचना होती रही है। इसमें काठमांडू-तराई फास्‍ट ट्रैक भी शामिल है जो कई साल पीछे चल रहा है और इसको लेकर सेना की खिंचाई हो चुकी है।

पाकिस्‍तान की राह पर नेपाल की सेना?

काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष स्‍तर पर हुई बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री प्रचंड को देश के दक्षिण इलाके में भारतीय सीमा की ओर स्थित इस फैक्‍ट्री के बारे में बताया गया। इस दौरान नेपाली सेना प्रमुख समेत कई मंत्री भी मौजूद थे। नेपाली सेना ने इस फैक्‍ट्री को लेकर एक अध्‍ययन कराया है ताकि इस ‘बीमार’ उद्योग को फिर से जिंदा किया जा सके। इस कपड़ा उद्योग को 48 साल पहले बनाया गया था और इसके लिए वित्‍तीय और तकनीकी मदद चीन से मिली थी। यह फैक्‍ट्री 24 साल तक सही चली थी लेकिन उसके बाद तत्‍कालीन राजा ज्ञानेंद्र शाह ने इसे बंद कर दिया। नेपाली सेना का अनुमान है कि इसको फिर से शुरू करने में 1.93 अरब नेपाली रुपये खर्च होंगे।

नेपाली सेना ने कहा कि करीब 9 साल तक इसे चलाने के बाद उससे फायदा होने लगेगा। वहीं नेपाली सेना के इस बिजनेस प्‍लान पर नेपाल के ही कई सुरक्षा विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह सेना का काम नहीं है कि वह बिजनेस करे। सेना को अपनी सैन्‍य क्षमता को बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि नेपाली सेना सुरक्षा की बजाय अब बिजनेस करने पर ज्‍यादा फोकस कर रही है। नेपाल मामलों के चर्चित भारतीय विशेषज्ञ प्रोफेसर एसडी मुनी का कहना है कि नेपाल सरकार को नेपाली सेना के कपड़ा फैक्‍ट्री के प्रबंधन को अपने हाथ में लेने के प्रस्‍ताव को सतर्कता के साथ लेने की जरूरत है। पाकिस्‍तान का अनुभव उनके लिए मार्गदर्शक बन सकता है। आर्मी का काम राष्‍ट्रीय सुरक्षा को देखना है न कि अर्थव्‍यवस्‍था को चलाना। बता दें कि पाकिस्‍तान में सेना खेती से लेकर बैंक तक चलाती है और पूरे देश में सेना प्रमुख का ही स‍िक्‍का चलता है।

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