उत्तर प्रदेशकुशीनगर

प्रसूता की बिगड़ी हालत के बाद खुली पोल, खिरकिया का मुन्ना पाली क्लिनिक सील

बिना मानकों के चल रहा था क्लिनिक! महिला की हालत गंभीर होने पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई


कुशीनगर। पडरौना कोतवाली क्षेत्र के खिरकिया में संचालित मुन्ना पाली क्लिनिक पर प्रशासन की कार्रवाई के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रसव के बाद एक महिला की हालत गंभीर होने के मामले में प्रशासन ने क्लिनिक को सील कर दिया, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर बिना मानकों के ऐसा अस्पताल लंबे समय तक कैसे संचालित होता रहा।


जानकारी के अनुसार बिहार के पश्चिमी चंपारण निवासी अर्जुन शाह अपनी पत्नी सीमा देवी को प्रसव के लिए खिरकिया स्थित मुन्ना पाली क्लिनिक लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते सही उपचार नहीं दिया और न ही किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया। हालत बिगड़ने पर मामले की शिकायत प्रशासन तक पहुंची। सूचना मिलने के बाद तहसीलदार अभिषेक मिश्रा और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लिनिक में जांच की। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक क्लिनिक का पंजीकरण आयुर्वेद पद्धति के नाम पर था, जबकि वहां अन्य प्रकार का उपचार किया जा रहा था। साथ ही आवश्यक अभिलेख, प्रशिक्षित चिकित्सक और स्वास्थ्य मानकों से संबंधित व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं मिलीं। जांच के बाद प्रशासन ने क्लिनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। हालांकि इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई निजी क्लिनिक और अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों व विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब और ग्रामीण परिवार मजबूरी में ऐसे अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचते हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं तक का अभाव रहता है। लोगों का कहना है कि यदि पहले नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की जाती, तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ने की नौबत नहीं आती।


फिलहाल प्रशासन मामले की जांच की बात कह रहा है, वहीं घटना के बाद इलाके में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।

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