रिश्वतखोरी और शिक्षक आत्महत्या प्रकरण में निलंबित बीएसए गिरफ्तार

चार माह से फरार चल रही शालिनी श्रीवास्तव दिल्ली से पकड़ी गईं, 25 हजार का था इनाम
देवरिया। शिक्षक आत्महत्या और कथित रिश्वतखोरी प्रकरण में निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव को गोरखपुर पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। वह मुकदमा दर्ज होने के बाद पिछले करीब चार माह से फरार चल रही थीं। उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि गोरखपुर के नगर पुलिस अधीक्षक निमिष पाटिल ने की है।
पुलिस के अनुसार, शालिनी श्रीवास्तव के दिल्ली में होने की सूचना मिलने पर विशेष टीम ने घेराबंदी कर उन्हें मंगलवार की रात गिरफ्तार कर लिया। लगातार फरार रहने के कारण उन पर पहले 10 हजार रुपये और बाद में बढ़ाकर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। न्यायालय ने उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट भी जारी किया था।
गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे मई 2026 के अंतिम सप्ताह में न्यायालय ने खारिज कर दिया था। न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि किसी सरकारी कार्यालय को अधिकारियों द्वारा आदेश बेचने की खुली दुकान नहीं बनने दिया जा सकता।
यह पूरा मामला कुशीनगर निवासी सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। कृष्ण मोहन सिंह देवरिया जिले के गौरी बाजार क्षेत्र में तैनात थे। उन्होंने 20 फरवरी 2026 की रात गोरखपुर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
मृतक शिक्षक के पास से चार पन्नों का सुसाइड नोट, एक वीडियो तथा ध्वनि अभिलेख प्राप्त हुआ था। इनमें आरोप लगाया गया था कि उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने के बदले तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव और उनके कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह ने उनसे तथा दो अन्य शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
सुसाइड नोट में यह भी उल्लेख था कि शिक्षकों ने गहने गिरवी रखकर और ऋण लेकर धनराशि की व्यवस्था की थी। इसके बावजूद 20 फरवरी को उन्हें कार्यालय बुलाकर धन की मांग को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया गया। इसी से आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।
मृतक शिक्षक की पत्नी की तहरीर पर गोरखपुर के गुलरिहा थाने में शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह तथा अन्य आरोपितों के विरुद्ध आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद शासन ने शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था। वही पुलिस के अनुसार, मामले का एक अन्य आरोपित लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।



