त्रिवेणी से भटककर नहर में फंसी गर्भवती डॉलफिन का सफल रेस्क्यू, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर राप्ती नदी में छोड़ा गया

तीन दिन तक नहर में फंसी रही 7 फीट 2 इंच लंबी मादा डॉलफिन, वन विभाग, चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन और पुलिस के संयुक्त अभियान से बची जान
हर्षोदय टाइम्स ब्यूरो
महराजगंज/कुशीनगर। त्रिवेणी नदी से भटककर नहर में पहुंची एक गर्भवती गंगा डॉलफिन को तीन दिन के कठिन रेस्क्यू अभियान के बाद सुरक्षित बचा लिया गया। डॉलफिन धीरे-धीरे बहते हुए परतावल क्षेत्र के धरमौली बाजार के पास कैनाल में फंस गई थी। लगातार तीन दिनों तक नहर में फंसी रहने के कारण उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा था। आखिरकार वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन, सिंचाई विभाग और पुलिस के संयुक्त प्रयास से उसका सफल रेस्क्यू कर सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तर प्रदेश श्रीमती अनुराधा बेमुरी तथा मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बी.सी. ब्रम्हा के निर्देशन में रेस्क्यू अभियान संचालित किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पहले दिन भी डॉलफिन को निकालने का प्रयास किया गया था, लेकिन लगातार बारिश के कारण नहर में पानी का स्तर और बहाव अत्यधिक तेज होने से सफलता नहीं मिल सकी।
इसके बाद सिंचाई विभाग से समन्वय कर नहर में पानी का प्रवाह कम कराया गया। मंगलवार को कुशीनगर वन प्रभाग की हाटा रेंज के अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्राम सभा के पास देवरिया कैनाल में विशेष अभियान चलाकर डॉलफिन का सफल रेस्क्यू किया गया।
रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह तथा टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने किया। इस दौरान गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर वन विभाग की संयुक्त टीम पूरी मुस्तैदी के साथ अभियान में जुटी रही।
रेस्क्यू के बाद डॉलफिन को विशेष डॉलफिन एम्बुलेंस में रखा गया, जहां डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने उसका प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में पता चला कि डॉलफिन 7 फीट 2 इंच लंबी, 147 किलोग्राम वजन की मादा है और गर्भवती भी है। विशेषज्ञों ने उसकी स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ने का निर्णय लिया।
डॉलफिन को सुरक्षित राप्ती नदी तक पहुंचाने के लिए गोरखपुर पुलिस ने भटहट से राजघाट तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया। इस व्यवस्था के चलते धरमौली से राजघाट तक की लगभग 52 किलोमीटर की दूरी महज 1 घंटा 5 मिनट में तय की गई। इसके बाद डॉलफिन को उसके सुरक्षित प्राकृतिक आवास राप्ती नदी में छोड़ दिया गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समय रहते किए गए इस संयुक्त अभियान से न केवल एक दुर्लभ गंगा डॉलफिन की जान बचाई जा सकी, बल्कि उसके गर्भस्थ शावक का जीवन भी सुरक्षित हो सका। अभियान की सफलता में वन विभाग, सिंचाई विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन और पुलिस प्रशासन की अहम भूमिका रही।



