गोरखपुर चिड़ियाघर में बनेंगे चिंपैंजी और जिराफ के नए बाड़े, 6.22 करोड़ का बजट मंजूर

दरियाई घोड़े के लिए बनेगा नया तालाब, रेस्क्यू वन्यजीवों के लिए चार सेल और 102 साल पुराना रेल इंजन भी होगा प्रदर्शित
गोरखपुर। गोरखपुर स्थित प्राणि उद्यान में दर्शकों के आकर्षण को बढ़ाने और वन्यजीवों की बेहतर देखभाल के लिए कई नई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। चिड़ियाघर में चिंपैंजी, जिराफ और हुक्कू बंदर को रखने के लिए नए बाड़े बनाए जाएंगे। इसके लिए मास्टर लेआउट में बदलाव किया जाएगा। वहीं, रेस्क्यू कर लाए जाने वाले वन्यजीवों के लिए अस्पताल परिसर में चार नए सेल, लायन के बाड़े में क्राल और दरियाई घोड़े के लिए नया तालाब तैयार किया जाएगा। सोमवार को प्राणि उद्यान सोसाइटी की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में वित्तीय वर्ष के लिए 6.22 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया।
प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण महेंद्र प्रसाद अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और दर्शकों की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। नए बाड़े तैयार होने के बाद चिड़ियाघर में चिंपैंजी, जिराफ और हुक्कू बंदर लाए जाएंगे। इसके साथ ही वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने के लिए रेस्क्यू वैन खरीदने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी।
बर्ड फ्लू से बचाव के लिए बढ़ेगी निगरानी
वन्यजीवों को बर्ड फ्लू जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए बाड़ों में जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। वन्यजीवों की देखभाल, साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के लिए कीपर और स्वीपर को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
102 साल पुराना रेल इंजन बनेगा आकर्षण
चिड़ियाघर में दर्शकों के आकर्षण के लिए सोहगीबरवा वन प्रभाग के लक्ष्मीपुर से 102 साल पुराना रेल इंजन लाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसे प्राणि उद्यान परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा। स्वीकृत बजट से वन्यजीवों के भोजन, कर्मचारियों के वेतन और विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
दर्शकों की सुविधाएं बढ़ाने पर जोर
शासन की ओर से विशेष आमंत्रित सदस्य अरविंद विक्रम चौधरी ने दर्शकों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने लंबे समय से बंद कैंटीन को तत्काल शुरू कराने, परिसर में गोल्फ कार्ट की व्यवस्था करने और दर्शकों को निशुल्क पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बच्चों के लिए वन्यजीवों से संबंधित ज्ञानवर्धक साइनबोर्ड लगाने और आकर्षक गतिविधियां शुरू करने का सुझाव भी दिया।
बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा बेमुरी, वन निगम के एमडी एपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक डॉ. बीसी ब्रह्मा, प्राणि उद्यान के निदेशक सूरज कुमार, डीएफओ शुभम सिंह और उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह मौजूद रहे। ऑनलाइन माध्यम से प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के डॉ. पराग निगम और आईवीआरआई बरेली के डॉ. एम. पावड़े भी बैठक से जुड़े।



